रीसेल फ्लैट खरीदते ही आया ₹80,000 का मेंटेनेंस बिल! क्या पुराने मालिक का बकाया नए खरीदार से वसूला जा सकता है? खरीदने से पहले जरूर जांचें ये 5 दस्तावेज
रीसेल (Resale) फ्लैट खरीदना आज के समय में घर खरीदने का एक लोकप्रिय विकल्प बन गया है। तैयार मकान मिलने, बेहतर लोकेशन और कई बार कम कीमत पर सौदा होने की वजह से लोग रीसेल प्रॉपर्टी को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन केवल फ्लैट की कीमत, लोकेशन और उसकी स्थिति देखकर खरीदारी करना बड़ी गलती साबित हो सकता है। अगर आपने जरूरी दस्तावेजों की जांच नहीं की, तो रजिस्ट्रेशन के बाद आपको पुराने मालिक के बकाया मेंटेनेंस शुल्क का भुगतान भी करना पड़ सकता है।
जरा सोचिए, आपने अपने सपनों का फ्लैट खरीद लिया, रजिस्ट्रेशन भी हो गया और कुछ दिनों बाद हाउसिंग सोसाइटी की ओर से ₹80,000 का नोटिस आ जाए, जिसमें कहा जाए कि यह पिछले मालिक का बकाया मेंटेनेंस है और अब आपको इसे जमा करना होगा। ऐसे मामलों में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि क्या हाउसिंग सोसाइटी पुराने मालिक का बकाया नए खरीदार से वसूल सकती है?
इसका जवाब हर मामले में एक जैसा नहीं होता। यह संबंधित राज्य के कानून, सोसाइटी के नियम, सेल डीड और खरीद-बिक्री के समझौते पर निर्भर करता है। इसलिए रीसेल फ्लैट खरीदने से पहले पूरी कानूनी जांच करना बेहद जरूरी है।
कोच्चि का मामला क्यों बना चर्चा का विषय?
हाल ही में केरल के कोच्चि से ऐसा ही एक मामला सामने आया। वर्ष 2022 में एक व्यक्ति ने बैंक से होम लोन लेकर एक रीसेल फ्लैट खरीदा। खरीदारी से पहले उसे पता चला कि फ्लैट पर करीब ₹80,000 का मेंटेनेंस बकाया है।
जब खरीदार ने पुराने मालिक से इस बारे में पूछा, तो उसने भरोसा दिलाया कि रजिस्ट्रेशन से पहले पूरा बकाया चुका दिया जाएगा। इस आश्वासन पर विश्वास करते हुए खरीदार ने फ्लैट की रजिस्ट्री करवा ली।
लेकिन फ्लैट का कब्जा लेने के कुछ ही दिनों बाद अपार्टमेंट एसोसिएशन ने नए मालिक को ₹80,000 का मेंटेनेंस बिल भेज दिया। एसोसिएशन का कहना था कि पुराने मालिक ने कभी बकाया जमा नहीं किया और बिना एनओसी (NOC) के फ्लैट की बिक्री नहीं होनी चाहिए थी।
नए खरीदार ने यह कहते हुए भुगतान करने से इनकार कर दिया कि यह रकम पुराने मालिक की जिम्मेदारी है। इसके बाद यह सवाल खड़ा हुआ कि आखिर इस बकाया राशि का भुगतान कौन करेगा।
क्या नए मालिक को पुराने मालिक का बकाया भरना होगा?
भारत में ऐसा कोई एक समान राष्ट्रीय कानून नहीं है, जो हर मामले में नए खरीदार को पुराने मालिक का बकाया मेंटेनेंस भरने के लिए बाध्य करता हो।
यह तय करने के लिए कई बातों पर ध्यान दिया जाता है, जैसे—
संबंधित राज्य का कानून
हाउसिंग सोसाइटी या अपार्टमेंट एसोसिएशन के नियम
सेल डीड में लिखी गई शर्तें
खरीद-बिक्री का समझौता
मामले की परिस्थितियां
कुछ मामलों में सोसाइटी वर्तमान मालिक से भुगतान की मांग कर सकती है, जबकि कई मामलों में पुराने मालिक को ही जिम्मेदार माना जा सकता है।
इसलिए यह मान लेना सही नहीं होगा कि केवल रजिस्ट्रेशन होने से पुराने सभी बकाया अपने आप खत्म हो जाते हैं।
सेल डीड की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण
किसी भी प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में सेल डीड सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है।
अगर इसमें साफ लिखा हो कि रजिस्ट्रेशन की तारीख तक के सभी मेंटेनेंस शुल्क, टैक्स, बिजली-पानी के बिल और अन्य देनदारियां पुराने मालिक द्वारा चुकाई जाएंगी, तो विवाद होने पर नए खरीदार की स्थिति काफी मजबूत हो सकती है।
हालांकि अंतिम फैसला संबंधित कानून और अदालत की व्याख्या पर निर्भर करेगा।
केवल मौखिक भरोसे पर न करें विश्वास
अक्सर खरीदार पुराने मालिक की बातों पर भरोसा कर लेते हैं कि सभी बकाया जल्द जमा कर दिए जाएंगे।
लेकिन केवल मौखिक आश्वासन भविष्य में किसी विवाद की स्थिति में पर्याप्त नहीं होता। इसलिए हर भुगतान और जिम्मेदारी का लिखित रिकॉर्ड जरूर रखें। कानूनी मामलों में लिखित दस्तावेजों का महत्व सबसे अधिक होता है।
रीसेल फ्लैट खरीदने से पहले जरूर जांचें ये 5 दस्तावेज
रीसेल प्रॉपर्टी खरीदते समय केवल घर की स्थिति देखना पर्याप्त नहीं है। नीचे दिए गए दस्तावेजों की जांच जरूर करें।
1. नो ड्यूज सर्टिफिकेट (No Dues Certificate)
फ्लैट खरीदने से पहले हाउसिंग सोसाइटी, अपार्टमेंट एसोसिएशन या रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) से लिखित नो ड्यूज सर्टिफिकेट जरूर लें।
यह प्रमाणित करता है कि फ्लैट पर कोई मेंटेनेंस या अन्य बकाया राशि नहीं है।
2. मेंटेनेंस बकाया की लिखित जानकारी लें
सिर्फ विक्रेता की बातों पर भरोसा न करें।
सोसाइटी से लिखित रूप में यह जानकारी लें कि—
कितना मेंटेनेंस बकाया है।
कोई जुर्माना या ब्याज बाकी है या नहीं।
कोई विशेष मेंटेनेंस शुल्क लंबित तो नहीं है।
अन्य कोई भुगतान बाकी तो नहीं है।
इससे भविष्य में विवाद की संभावना कम हो जाती है।
3. सेल एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ें
खरीद-बिक्री का समझौता पूरी तरह पढ़ें और सुनिश्चित करें कि उसमें स्पष्ट लिखा हो—
पुराने बकाया का भुगतान कौन करेगा।
खरीदार की जिम्मेदारी कब से शुरू होगी।
यदि विवाद होता है तो दोनों पक्षों की जिम्मेदारी क्या होगी।
जरूरत पड़े तो किसी अनुभवी प्रॉपर्टी वकील से दस्तावेज की जांच जरूर कराएं।
4. सोसाइटी के नियमों की जानकारी लें
हर हाउसिंग सोसाइटी के अपने अलग नियम होते हैं।
कहीं मेंटेनेंस बकाया को लेकर अलग व्यवस्था होती है, तो कहीं ट्रांसफर फीस या एनओसी की शर्तें अलग होती हैं। इसलिए खरीदारी से पहले सोसाइटी के नियम अच्छी तरह समझ लें।
5. प्रॉपर्टी के सभी दस्तावेजों की जांच करें
मेंटेनेंस शुल्क के अलावा इन दस्तावेजों की भी जांच जरूरी है—
स्वामित्व (Ownership) के दस्तावेज
टाइटल रिकॉर्ड
कब्जा प्रमाणपत्र (Possession Certificate)
कंप्लीशन सर्टिफिकेट
ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (जहां लागू हो)
रेरा (RERA) पंजीकरण
प्रॉपर्टी टैक्स की रसीदें
बिजली और पानी के बिल
अन्य सरकारी बकाया
इन सभी दस्तावेजों की जांच से भविष्य में कानूनी और वित्तीय जोखिम काफी हद तक कम हो जाते हैं।
अगर ऐसा नोटिस मिले तो क्या करें?
अगर फ्लैट खरीदने के बाद सोसाइटी आपको पुराने मालिक का बकाया जमा करने का नोटिस भेजती है, तो बिना पूरी जानकारी के तुरंत भुगतान न करें।
सबसे पहले—
अपनी सेल डीड ध्यान से पढ़ें।
सोसाइटी से बकाया का पूरा विवरण मांगें।
पुराने मालिक से संपर्क करें, यदि उसने भुगतान का वादा किया था।
सभी दस्तावेज और लिखित रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
किसी योग्य प्रॉपर्टी वकील से कानूनी सलाह लें।
क्योंकि अलग-अलग राज्यों के कानून और सोसाइटी के नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए हर मामले का समाधान भी अलग हो सकता है।
निष्कर्ष
रीसेल फ्लैट खरीदना केवल कीमत तय करने और रजिस्ट्रेशन कराने तक सीमित नहीं है। अगर खरीदारी से पहले जरूरी दस्तावेजों की सही जांच नहीं की गई, तो बाद में पुराने मेंटेनेंस शुल्क, टैक्स या अन्य बकाया का विवाद सामने आ सकता है।
इसलिए फ्लैट खरीदने से पहले नो ड्यूज सर्टिफिकेट लें, सेल डीड को ध्यान से पढ़ें, सोसाइटी के नियम समझें और सभी कानूनी दस्तावेजों की जांच जरूर करें। थोड़ी-सी सावधानी आपकी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने के साथ-साथ भविष्य के महंगे कानूनी विवादों और अनचाहे खर्चों से भी बचा सकती है।

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