कोई हाउसिंग सोसायटी किसी सदस्य की रकम केवल उसे “नॉन-रिफंडेबल” यानी वापस न करने योग्य बताकर अपने पास नहीं रख सकती। अगर सोसायटी किसी रकम को रोककर रखना चाहती है, तो उसे यह साबित करना होगा कि उसके पास ऐसा करने का वैध कानूनी आधार है। एक हालिया मामले में को-ऑपरेटिव कोर्ट ने इसी सिद्धांत को स्पष्ट करते हुए मुंबई के कांदिवली वेस्ट स्थित एक हाउसिंग सोसायटी को अपने दो सदस्यों को ₹50,000 वापस करने का आदेश दिया। कोर्ट ने RNA Regency Park Tower Co-operative Housing Society को जिग्नेश खिरैया और कुसुम के. खिरैया को ₹50,000 लौटाने के साथ उस पर 6% सालाना साधारण ब्याज देने का भी निर्देश दिया। ब्याज की गणना 30 जनवरी 2022 से की जाएगी। यही वह तारीख थी जब सोसायटी को दंपति की रकम वापस करने की लिखित मांग मिली थी। पूरी रकम वापस होने तक ब्याज जारी रहेगा। कोर्ट ने सोसायटी को दंपति का कानूनी खर्च भी चुकाने का आदेश दिया। विवाद की शुरुआत कैसे हुई? यह विवाद जून 2017 में शुरू हुआ, जब दंपति ने हाउसिंग सोसायटी में अपना फ्लैट ट्रांसफर किया। इस प्रक्रिया के दौरान उन्होंने स्टिल्ट पार्किंग के लिए ₹75,000 की जमा राशि क...