महाराष्ट्र की हाउसिंग सोसायटियों के लिए बड़ा बदलाव: अब कौन कितना मेंटेनेंस भरेगा? सरकार बना रही नया नियम, विवाद होंगे कम
महाराष्ट्र की लाखों हाउसिंग सोसायटियों में मेंटेनेंस चार्ज को लेकर वर्षों से एक बड़ा सवाल बना हुआ है — क्या मेंटेनेंस फ्लैट के आकार के हिसाब से लिया जाना चाहिए या फिर सभी सदस्यों से बराबर शुल्क लिया जाना चाहिए? अब महाराष्ट्र सरकार इस समस्या को खत्म करने के लिए हाउसिंग सोसायटी के नियमों में बदलाव करने की तैयारी कर रही है। नए नियमों का उद्देश्य मेंटेनेंस शुल्क, सर्विस चार्ज, सिंकिंग फंड, रिपेयर फंड और अन्य खर्चों को लेकर स्पष्टता लाना है। इस बदलाव से राज्य की 1.5 लाख से ज्यादा हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले लाखों लोगों को राहत मिल सकती है, क्योंकि मेंटेनेंस को लेकर होने वाले विवादों में कमी आने की उम्मीद है। हाउसिंग सोसायटियों में मेंटेनेंस विवाद क्यों होता है? कई हाउसिंग सोसायटियों में फ्लैट मालिकों के बीच यह विवाद रहता है कि मेंटेनेंस किस आधार पर लिया जाए। कुछ सोसायटियां फ्लैट के एरिया यानी स्क्वायर फीट के हिसाब से शुल्क लेती हैं, जबकि कई लोग मानते हैं कि कुछ सेवाओं का इस्तेमाल सभी सदस्य बराबर करते हैं, इसलिए उनका शुल्क भी समान होना चाहिए। उदाहरण के लिए, सिक्योरिटी गार्ड, सफाई, सोसाय...