परिवार के सदस्यों को संपत्ति देना एक बड़ा निर्णय होता है, जिसमें भावनात्मक और वित्तीय दोनों पहलू शामिल होते हैं। अक्सर संपत्ति मालिक यह तय नहीं कर पाते कि वे अपनी संपत्ति गिफ्ट डीड (Gift Deed) के माध्यम से दें या वसीयत (Will) बनाएं। दोनों ही कानूनी साधन हैं, लेकिन इनमें समय, कर (टैक्स) और कानूनी निहितार्थ के हिसाब से अंतर होता है। सही जानकारी से ही संपत्ति हस्तांतरण और भविष्य में विवादों से बचा जा सकता है। गिफ्ट डीड क्या है? गिफ्ट डीड एक कानूनी दस्तावेज है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति या धन को बिना किसी पैसे के विचार के अपने जीवनकाल में ही दूसरों को दे सकता है। जैसे ही गिफ्ट डीड बनकर रजिस्टर्ड हो जाती है और प्राप्तकर्ता द्वारा स्वीकार की जाती है, संपत्ति तुरंत उसके नाम हो जाती है। उदाहरण के लिए, रमेश मेहता , 68 वर्षीय सेवानिवृत्त, जिनके पास ₹2 करोड़ की एक मकान है। यदि वे इसे अपनी बेटी नेहा को गिफ्ट डीड के माध्यम से हस्तांतरित करते हैं, तो रजिस्ट्री के तुरंत बाद नेहा संपत्ति की कानूनी मालिक बन जाती है। लेकिन इसके लिए स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क देना आवश्यक है। और ग...