घर खरीदने जा रहे हैं? ये ज़रूरी प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स पहले ज़रूर जांचें, वरना हो सकता है बड़ा फ्रॉड
अपना खुद का घर खरीदना हर इंसान का सपना होता है। यह सिर्फ एक ज़रूरत नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है। खासकर मध्यम वर्ग के लोगों के लिए घर या फ्लैट खरीदना जीवन का सबसे बड़ा आर्थिक फैसला होता है। इसके लिए लोग सालों तक बचत करते हैं, योजनाएं बनाते हैं और कई बार होम लोन भी लेते हैं।
लेकिन घर खरीदना केवल अच्छी लोकेशन चुनने या सही कीमत तय करने तक सीमित नहीं है। इसमें सबसे ज़रूरी भूमिका होती है कानूनी दस्तावेज़ों (डॉक्यूमेंट्स) की। अगर इन कागज़ों में थोड़ी सी भी लापरवाही हुई, तो यह आपके लिए धोखाधड़ी, कानूनी विवाद और भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है।
भारत में प्रॉपर्टी से जुड़े विवाद बहुत आम हैं और इनमें से ज़्यादातर मामलों की जड़ सही डॉक्यूमेंट्स की जांच न करना होती है। इस लेख में हम आपको सरल और आसान भाषा में बताएंगे कि घर, फ्लैट या किसी भी प्रॉपर्टी को खरीदने से पहले कौन-कौन से दस्तावेज़ ज़रूर जांचने चाहिए।
प्रॉपर्टी खरीदते समय डॉक्यूमेंट्स क्यों ज़रूरी हैं?
प्रॉपर्टी से जुड़े दस्तावेज़ यह साबित करते हैं कि:
प्रॉपर्टी का असली मालिक कौन है
उस पर कोई लोन या कानूनी दावा तो नहीं है
निर्माण कानूनी नियमों के अनुसार हुआ है या नहीं
अगर डॉक्यूमेंट्स सही नहीं हुए, तो आपको भविष्य में इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:
मालिकाना हक़ को लेकर विवाद
लंबे समय तक चलने वाले कोर्ट केस
लाखों-करोड़ों रुपये का नुकसान
प्रॉपर्टी को आगे बेचने में दिक्कत
इसलिए प्रॉपर्टी खरीदते समय जल्दबाज़ी बिल्कुल न करें।
घर या प्रॉपर्टी खरीदते समय ज़रूर जांचें ये अहम दस्तावेज़
नीचे उन सभी ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स की जानकारी दी गई है, जिन्हें खरीदारी से पहले ध्यान से जांचना बेहद आवश्यक है।
1. टाइटल डीड (Title Deed)
टाइटल डीड यह साबित करता है कि विक्रेता उस प्रॉपर्टी का कानूनी मालिक है और उसे बेचने का पूरा अधिकार है।
क्यों ज़रूरी है:
अगर विक्रेता असली मालिक नहीं हुआ, तो सौदा रद्द हो सकता है और आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
क्या जांचें:
मालिक का नाम
प्रॉपर्टी का पूरा विवरण
कोई कानूनी विवाद तो नहीं
2. चेन ऑफ टाइटल डॉक्यूमेंट्स
इसमें प्रॉपर्टी के सभी पुराने मालिकों का रिकॉर्ड होता है।
क्यों ज़रूरी है:
यह सुनिश्चित करता है कि प्रॉपर्टी हर बार कानूनी तरीके से ट्रांसफर हुई है।
क्या जांचें:
मालिकों की पूरी श्रृंखला
बीच में कोई खाली या संदिग्ध ट्रांसफर न हो
3. भार प्रमाणपत्र (Encumbrance Certificate)
यह प्रमाणपत्र बताता है कि प्रॉपर्टी पर कोई कर्ज, गारंटी या कोर्ट केस तो नहीं है।
क्यों ज़रूरी है:
अगर प्रॉपर्टी पर पहले से लोन हुआ, तो उसकी ज़िम्मेदारी आप पर आ सकती है।
क्या जांचें:
कोई पेंडिंग लोन नहीं
कोई कानूनी दावा नहीं
4. विक्री करार (Sale Agreement)
यह खरीददार और विक्रेता के बीच हुआ कानूनी समझौता होता है।
इसमें क्या होता है:
प्रॉपर्टी की कुल कीमत
भुगतान की शर्तें
कब्ज़ा मिलने की तारीख
दोनों पक्षों की ज़िम्मेदारियाँ
क्यों ज़रूरी है:
यह भविष्य के विवादों से बचाता है।
5. प्रॉपर्टी टैक्स रसीद
इससे पता चलता है कि प्रॉपर्टी टैक्स समय पर भरा गया है या नहीं।
क्यों ज़रूरी है:
अगर टैक्स बकाया हुआ, तो बाद में आपको भरना पड़ सकता है।
क्या जांचें:
लेटेस्ट टैक्स रसीद
कोई बकाया नहीं
6. स्वीकृत बिल्डिंग प्लान
घर या फ्लैट खरीदने से पहले यह देखना ज़रूरी है कि बिल्डिंग प्लान स्थानीय प्राधिकरण से मंज़ूर है।
क्यों ज़रूरी है:
अवैध निर्माण पर भविष्य में जुर्माना या तोड़फोड़ हो सकती है।
7. कम्प्लीशन सर्टिफिकेट (Completion Certificate)
यह प्रमाणित करता है कि इमारत तय नियमों और स्वीकृत प्लान के अनुसार बनी है।
क्यों ज़रूरी है:
इसके बिना इमारत को अवैध माना जा सकता है।
8. ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC)
यह बताता है कि इमारत रहने के लिए सुरक्षित और उपयुक्त है।
क्यों ज़रूरी है:
OC के बिना रहना कानूनी और सुरक्षा दोनों दृष्टि से जोखिम भरा हो सकता है।
9. RERA रजिस्ट्रेशन
अधिकांश रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स का RERA में पंजीकरण होना अनिवार्य है।
क्यों ज़रूरी है:
यह खरीदारों को धोखाधड़ी से बचाता है।
क्या जांचें:
RERA रजिस्ट्रेशन नंबर
प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी
10. ना-हरकत प्रमाणपत्र (NOC)
बिल्डर या विक्रेता को कई विभागों से NOC लेनी होती है, जैसे:
फायर डिपार्टमेंट
पर्यावरण विभाग
पानी और बिजली विभाग
क्यों ज़रूरी है:
इनके बिना भविष्य में सेवाओं में दिक्कत आ सकती है।
11. पज़ेशन लेटर
यह प्रमाण होता है कि प्रॉपर्टी आधिकारिक रूप से आपको सौंप दी गई है।
क्यों ज़रूरी है:
यह आपके कब्ज़े का कानूनी सबूत है।
12. लोन क्लोज़र सर्टिफिकेट (यदि लागू हो)
अगर प्रॉपर्टी पर पहले कोई लोन था, तो बैंक से लोन बंद होने का प्रमाणपत्र ज़रूर लें।
क्यों ज़रूरी है:
यह सुनिश्चित करता है कि बैंक का कोई दावा बाकी नहीं है।
निष्कर्ष
घर खरीदना खुशी का पल होता है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही इसे बड़ी परेशानी में बदल सकती है। हमेशा याद रखें — प्रॉपर्टी से ज़्यादा ज़रूरी उसके डॉक्यूमेंट्स होते हैं।
सौदा करने से पहले:
हर दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें
ओरिजिनल और कॉपी दोनों जांचें
ज़रूरत पड़े तो कानूनी सलाह ज़रूर लें
आज की सतर्कता आपको भविष्य की बड़ी मुसीबतों से बचा सकती है। आपका सपना घर खुशियों का कारण बने, परेशानी का नहीं।

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