भारत में सड़क परिवहन और प्रदूषण से जुड़ी नीतियों में लगातार बदलाव किए जा रहे हैं। हाल ही में केंद्र सरकार ने एक बड़ा निर्णय लिया है, जिससे लाखों पुराने वाहन मालिक प्रभावित होंगे। "मोटर व्हीकल एक्ट (थर्ड अमेंडमेंट)" के तहत अब गाड़ियों की रजिस्ट्रेशन अवधि 15 साल से बढ़ाकर 20 साल कर दी गई है। यानी आपकी गाड़ी 20 साल तक सड़क पर कानूनी रूप से चल सकती है। लेकिन इसके साथ ही सरकार ने पुराने वाहनों की रजिस्ट्रेशन फीस दोगुनी कर दी है।
21 अगस्त 2025 से लागू हुए इस नियम का सीधा असर पुराने वाहनों के मालिकों की जेब पर पड़ेगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से लोग नई और कम प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की ओर आकर्षित होंगे।
नया नियम क्या कहता है?
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अब वाहन का पहला पंजीकरण (registration) 20 साल तक मान्य रहेगा।
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20 साल पूरे होने के बाद वाहन मालिक को रजिस्ट्रेशन नवीनीकरण कराना होगा।
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नवीनीकरण शुल्क अब दोगुना कर दिया गया है।
बढ़ी हुई फीस की पूरी सूची
सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर अलग-अलग वाहनों के लिए नए शुल्क तय किए हैं:
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20 साल से पुराने दोपहिया वाहन (मोटरसाइकिल) → ₹2,000
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20 साल से पुराने तीन पहिया वाहन (ऑटो रिक्शा आदि) → ₹5,000
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20 साल से पुराने हल्के मोटर वाहन (कार, जीप आदि) → ₹10,000
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20 साल से पुराने आयातित 2 या 3 पहिया वाहन → ₹20,000
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20 साल से पुराने आयातित 4 पहिया वाहन → ₹80,000
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15 साल से अधिक पुराने लेकिन 20 साल से कम उम्र के वाहन → पुरानी फीस ही लागू रहेगी।
👉 ध्यान रहे, यह सभी शुल्क GST के अतिरिक्त हैं।
NCR में स्थिति अलग क्यों है?
दिल्ली और आसपास के इलाकों (NCR) में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पहले से लागू हैं।
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पेट्रोल वाहन: 15 साल के बाद बैन
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डीज़ल वाहन: 10 साल के बाद बैन
2018 में सुप्रीम कोर्ट ने NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश को सही ठहराया था। फिलहाल मामला दोबारा कोर्ट में चल रहा है और अंतरिम आदेश में कोर्ट ने कहा है कि फिलहाल वाहन मालिकों पर कोई जबरन कार्रवाई न की जाए।
इसलिए दिल्ली-NCR के वाहन मालिकों को इस नए नियम का फायदा तभी मिलेगा जब सुप्रीम कोर्ट अंतिम फैसला सुनाएगा।
क्यों बढ़ाई गई फीस?
सरकार के इस कदम के पीछे कई बड़े कारण बताए गए हैं:
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प्रदूषण पर रोक:
पुराने वाहन ज़्यादा धुआँ और प्रदूषक गैसें छोड़ते हैं। सरकार चाहती है कि लोग धीरे-धीरे इन्हें हटाकर नई और कम प्रदूषण करने वाली गाड़ियाँ खरीदें। -
BS-II से पहले बनी गाड़ियाँ:
2005 से पहले बनी कई गाड़ियाँ BS-II (Bharat Stage II) उत्सर्जन मानकों से पहले की हैं, जो आज के पर्यावरण मानकों के हिसाब से खतरनाक हैं। -
सड़क सुरक्षा:
पुराने वाहन तकनीकी रूप से कमजोर हो जाते हैं। ब्रेकिंग, इंजन परफॉर्मेंस और स्ट्रक्चर में दिक्कतें आती हैं, जो सड़क हादसों का कारण बन सकती हैं।
व्यावसायिक गाड़ियों पर असर
फरवरी 2025 में सरकार ने ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर भारी और मध्यम व्यावसायिक वाहनों (ट्रक और बस) की फीस बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था।
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15 साल से पुराने कमर्शियल वाहनों → प्रस्तावित फीस ₹12,000 से ₹18,000
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20 साल से पुराने कमर्शियल वाहनों → प्रस्तावित फीस ₹24,000 से ₹36,000
लेकिन ट्रांसपोर्ट संगठनों के विरोध के कारण फिलहाल इस प्रस्ताव को रोक दिया गया है। अभी केवल ₹12,000 ही तय किया गया है।
फिटनेस टेस्ट का नया ढांचा
सरकार जल्द ही ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्ट स्टेशनों की संख्या बढ़ाने वाली है। ऐसे में हर वाहन को समय-समय पर फिटनेस टेस्ट देना होगा।
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फिटनेस टेस्ट में वाहन का धुआँ, इंजन, ब्रेक और सुरक्षा मानकों की जांच होगी।
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पहले फिटनेस टेस्ट की फीस में अचानक बढ़ोतरी का विरोध हुआ था, लेकिन अब सरकार नया ढांचा लाने जा रही है।
वाहन मालिकों के लिए इसका मतलब क्या है?
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अगर आपकी गाड़ी 20 साल पुरानी है:
आपको अब ₹2,000 से लेकर ₹10,000 तक खर्च करना होगा। -
अगर आयातित गाड़ी है:
खर्च और भी ज्यादा होगा (₹20,000–₹80,000)। -
अगर आप NCR में रहते हैं:
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतिम आदेश तक राहत या पाबंदी का इंतजार करना होगा। -
अगर आप नई गाड़ी खरीदने की सोच रहे हैं:
तो यह नीति आपको पुराने वाहन छोड़ने और नई गाड़ी लेने के लिए प्रेरित कर सकती है।
आलोचना और समर्थन
समर्थन में तर्क
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प्रदूषण कम होगा।
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लोग नई तकनीक वाली गाड़ियाँ खरीदेंगे।
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सड़क सुरक्षा बढ़ेगी।
आलोचना में तर्क
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अचानक दोगुनी फीस गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर बोझ डालेगी।
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ग्रामीण इलाकों में कई लोग 20 साल पुरानी गाड़ियों पर ही निर्भर हैं।
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ट्रक और बस मालिकों के लिए यह निर्णय बहुत भारी पड़ सकता है।
निष्कर्ष
सरकार का यह कदम एक ओर पर्यावरण और सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में है, वहीं दूसरी ओर यह वाहन मालिकों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती भी है।
21 अगस्त 2025 से लागू यह नियम आने वाले समय में लोगों को मजबूर करेगा कि वे नई गाड़ियाँ खरीदें या पुराने वाहन छोड़ दें। NCR में इसका प्रभाव सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के बाद ही साफ होगा।
यह बदलाव भारत में "ग्रीन मोबिलिटी" और "स्वच्छ भारत" की दिशा में एक बड़ा कदम है। लेकिन यह भी सच है कि यह फैसला लाखों परिवारों और ट्रांसपोर्ट उद्योग की जेब पर भारी पड़ने वाला है।
✍️ लेखक का संदेश:
पुराने वाहनों से लगाव स्वाभाविक है। लेकिन समय और तकनीक के साथ बदलाव भी जरूरी है। अगर यह नीति सही तरह से लागू की गई और साथ ही आम जनता को राहत देने के लिए स्क्रैपेज पॉलिसी या सब्सिडी दी गई, तो यह भारत के लिए एक ऐतिहासिक सुधार साबित हो सकता है।
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