अब 15 दिनों में निपटेंगे क्लेम, देरी पर बैंक को देना होगा मुआवज़ा
परिवार में किसी प्रियजन के निधन के बाद केवल शोक ही नहीं, बल्कि कई तरह की व्यावहारिक परेशानियाँ भी सामने आती हैं। खासकर जब बात बैंक अकाउंट, लॉकर या सुरक्षित वस्तुओं से जुड़े लेन-देन की होती है। अब तक इस प्रक्रिया में काफी समय लगता था और परिवार को बार-बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे। इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक नया नियम प्रस्तावित किया है, जो नॉमिनी और कानूनी वारिसों दोनों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।
नया नियम क्या है?
आरबीआई ने "बैंकों के मृत ग्राहकों के संबंध में दावों का निपटान निर्देश – 2025" का मसौदा जारी किया है। इसके अनुसार:
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मृतक ग्राहक के बैंक अकाउंट, लॉकर और सुरक्षित वस्तुओं से जुड़े क्लेम अब केवल 15 दिनों में सेटल करने होंगे।
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यदि बैंक इस समयसीमा में देरी करता है, तो उसे मुआवज़ा देना अनिवार्य होगा।
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बैंक को अपने ग्राहकों के लिए एक मानकीकृत फॉर्म और आवश्यक दस्तावेज़ों की सूची वेबसाइट और शाखा दोनों पर उपलब्ध करानी होगी।
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क्लेम प्रक्रिया की पूरी जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी, ताकि परिवार को इधर-उधर भटकना न पड़े।
नॉमिनी वाले अकाउंट और लॉकर के लिए प्रक्रिया
यदि किसी ग्राहक ने अपने बैंक अकाउंट या लॉकर के लिए पहले से नॉमिनी दर्ज कर रखा है, तो प्रक्रिया बेहद सरल होगी।
दावेदार को केवल तीन दस्तावेज जमा करने होंगे:
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क्लेम फॉर्म
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मृत्यु प्रमाण पत्र
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पहचान और पते का प्रमाण
यानी अब नॉमिनी को लंबे-चौड़े कानूनी दस्तावेज़ों की ज़रूरत नहीं होगी।
बिना नॉमिनी वाले अकाउंट और लॉकर
कई बार ग्राहक अकाउंट खोलते समय नॉमिनी का नाम दर्ज नहीं कराते। ऐसे मामलों में कानूनी वारिसों के लिए आरबीआई ने भी आसान प्रक्रिया तय की है।
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15 लाख रुपये तक के क्लेम:
कानूनी उत्तराधिकारियों को इंडेम्निटी बॉन्ड और नॉन-ऑब्जेक्शन (NOC) जैसे दस्तावेज़ जमा करने होंगे। -
15 लाख रुपये से अधिक के क्लेम:
इसके लिए कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र अनिवार्य होगा।
बैंकों पर सख्त पेनल्टी का प्रावधान
आरबीआई ने साफ कर दिया है कि यदि बैंक क्लेम प्रक्रिया में देरी करेगा, तो उसे कड़ी सज़ा भुगतनी होगी।
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बैंक डिपॉज़िट से जुड़े क्लेम: बैंक दर (Bank Rate) से 4% अधिक ब्याज देना होगा।
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लॉकर या सुरक्षित वस्तुओं से जुड़े क्लेम: हर दिन 5,000 रुपये जुर्माना देना होगा।
इसका सीधा मतलब यह है कि अब बैंक लापरवाही नहीं कर पाएंगे।
क्यों ज़रूरी था यह बदलाव?
भारतीय परिवारों में अक्सर देखा गया है कि किसी सदस्य की मृत्यु के बाद बैंक कार्यवाही करने में महीनों लग जाते हैं।
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परिवार पहले से मानसिक तनाव में होता है।
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बैंक की जटिल प्रक्रिया, अलग-अलग शाखाओं के नियम और दस्तावेज़ों की लंबी सूची इस परेशानी को और बढ़ा देती है।
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कई बार वारिसों को वकील की मदद लेनी पड़ती है, जिससे खर्च भी बढ़ता है।
आरबीआई का यह नया कदम इन सारी कठिनाइयों को कम करेगा और परिवार को आर्थिक सुरक्षा जल्द मिल सकेगी।
कब से लागू होंगे नए नियम?
आरबीआई ने इस मसौदे पर जनता से राय मांगी है। अंतिम ड्राफ्ट तैयार होने के बाद ये नियम 1 जनवरी, 2026 से लागू किए जा सकते हैं।
ग्राहकों को क्या करना चाहिए?
इन नियमों का फायदा तभी मिलेगा, जब ग्राहक खुद कुछ ज़रूरी सावधानियाँ बरतें।
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नॉमिनी ज़रूर जोड़ें – बैंक अकाउंट और लॉकर दोनों में नॉमिनी रजिस्टर्ड करना अनिवार्य मानें।
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दस्तावेज़ अपडेट रखें – आधार, पैन, पते का प्रूफ आदि नियमित रूप से अपडेट करें।
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परिवार को जानकारी दें – अकाउंट और लॉकर से जुड़े ज़रूरी कागज़ात, नॉमिनी का नाम और बैंक शाखा की जानकारी परिवार के भरोसेमंद सदस्य के साथ साझा करें।
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वसीयत (Will) तैयार करें – बड़े निवेश और संपत्ति के मामलों में वसीयत तैयार करना कानूनी विवादों से बचने का सबसे आसान तरीका है।
समाज पर असर
यह बदलाव केवल व्यक्तिगत परिवारों के लिए राहत नहीं है, बल्कि पूरे बैंकिंग सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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ग्राहक सेवा में सुधार – बैंकों की छवि और विश्वसनीयता मजबूत होगी।
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कानूनी विवादों में कमी – क्लेम जल्दी निपटने से अनावश्यक कोर्ट केस घटेंगे।
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आर्थिक सुरक्षा की गारंटी – परिवारों को जल्द आर्थिक मदद मिल सकेगी, जिससे जीवन की मुश्किलें कम होंगी।
एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए, किसी व्यक्ति के नाम पर बैंक अकाउंट और लॉकर है, लेकिन अचानक उनका निधन हो जाता है।
पहले क्या होता था?
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परिवार को बार-बार बैंक जाना पड़ता।
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अलग-अलग अधिकारी अलग दस्तावेज़ मांगते।
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कई महीनों तक पैसा और लॉकर बंद रहते।
अब क्या होगा?
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यदि नॉमिनी दर्ज है, तो केवल मृत्यु प्रमाण पत्र और आईडी सबमिट करनी होगी।
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बैंक 15 दिनों में क्लेम सेटल करेगा।
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देरी पर बैंक को मुआवज़ा देना होगा।
आरबीआई का उद्देश्य
आरबीआई का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य है:
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ग्राहकों और उनके परिवारों की परेशानी कम करना।
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बैंकों की मनमानी और अलग-अलग प्रक्रियाओं को खत्म करना।
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पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना।
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भारत की बैंकिंग प्रणाली को और ग्राहक-केंद्रित बनाना।
निष्कर्ष
आरबीआई का यह नया नियम देशभर के करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए राहत की खबर है। किसी सदस्य की मृत्यु जैसी कठिन घड़ी में परिवार को बैंकिंग प्रक्रिया आसान और तेज़ मिले, यही इस बदलाव का मूल उद्देश्य है।
अब नॉमिनी और कानूनी वारिसों को अपने अधिकार पाने के लिए लंबे इंतज़ार या कानूनी जटिलताओं से नहीं जूझना पड़ेगा। इसके साथ ही, बैंकों पर भी ज़िम्मेदारी तय हो जाएगी कि वे समय पर काम पूरा करें।
यदि ग्राहक पहले से नॉमिनी दर्ज करें और दस्तावेज़ अपडेट रखें, तो यह प्रक्रिया और भी आसान हो जाएगी।
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