हाउसिंग सोसायटी में रहना मतलब सिर्फ घर का मालिक होना नहीं, बल्कि सामूहिक ज़िम्मेदारियों को भी निभाना है। सबसे ज़्यादा विवाद सोसायटी में मेंटेनेंस चार्जेस को लेकर होते हैं—खासकर लिफ्ट की मरम्मत और रखरखाव पर।
अक्सर सवाल उठता है: “अगर मैं ग्राउंड या पहले मंज़िल पर रहता हूँ और लिफ्ट का इस्तेमाल नहीं करता, तो मुझे इसके रखरखाव और मरम्मत का खर्च क्यों देना चाहिए?”
इसका जवाब सोसायटी के कानून, उपविधि और कोर्ट के फ़ैसलों में छिपा है। आइए इसे समझते हैं।
असली मुद्दा: लिफ्ट का खर्च कौन देगा?
अक्सर जब लिफ्ट की मरम्मत या रिप्लेसमेंट पर लाखों रुपये खर्च आते हैं तो निचली मंज़िलों के सदस्य आपत्ति करते हैं। उनका तर्क होता है: “हम लिफ्ट का इस्तेमाल ही नहीं करते, तो पैसे क्यों दें?”
लेकिन कानून साफ कहता है कि लिफ्ट की मरम्मत और रखरखाव का खर्च सभी सदस्यों को बराबरी से देना होगा।
नियम ऐसे क्यों हैं?
सोसायटी का मकसद है साझा सुविधाओं का सामूहिक स्वामित्व और रखरखाव।
लिफ्ट, सीढ़ियां, पानी की टंकी, कंपाउंड वॉल और पूरी इमारत की संरचना किसी एक सदस्य की नहीं बल्कि सभी की होती है।
इसलिए भले ही कोई सदस्य व्यक्तिगत रूप से किसी सुविधा का उपयोग न करे, लेकिन उसकी देखभाल की ज़िम्मेदारी उस पर भी आती है।
उदाहरण के लिए:
-
आप बच्चों का खेल का मैदान इस्तेमाल न करें, फिर भी उसका खर्च देते हैं।
-
आप वाहन पार्क न करें, फिर भी सुरक्षा का खर्च साझा करते हैं।
-
उसी तरह ग्राउंड फ्लोर पर रहते हुए भी लिफ्ट का खर्च देना पड़ता है।
कानूनी पहलू
1. सोसायटी की मॉडल उपविधियाँ (नियम 65 से 71)
इनमें साफ लिखा है कि चार्जेस कैसे बाँटे जाएंगे।
-
नियम 65 में “सेवा शुल्क” यानी मेंटेनेंस के अंदर सभी खर्च शामिल हैं—बिजली, पानी, सुरक्षा और लिफ्ट रखरखाव व मरम्मत।
-
यह शुल्क सभी सदस्यों से समान रूप से लिया जाएगा—भले ही फ्लैट का क्षेत्रफल या लिफ्ट उपयोग अलग हो।
2. नियम 67 A (4)
यह नियम खासतौर से कहता है कि लिफ्ट रखरखाव व मरम्मत का खर्च उस बिल्डिंग के सभी सदस्यों को बराबर देना होगा जिसमें लिफ्ट उपलब्ध है।
3. हाई कोर्ट के निर्णय
मुंबई हाई कोर्ट ने कई मामलों में फैसला सुनाया है कि सामूहिक खर्च सभी पर बराबरी से लागू होंगे। कोई सदस्य यह कहकर मुक्त नहीं हो सकता कि उसने सुविधा का उपयोग नहीं किया।
4. अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट – धारा 17
सिर्फ सोसायटी ही नहीं बल्कि अपार्टमेंट्स पर भी यही नियम लागू होता है। कोई भी अपार्टमेंट मालिक साझा सुविधाओं का खर्च देने से इनकार नहीं कर सकता, चाहे वह उनका उपयोग करे या न करे।
व्यावहारिक कारण
1. आपातकालीन स्थिति
ग्राउंड या पहले मंज़िल का सदस्य भी कभी मेडिकल इमरजेंसी, बुजुर्ग/बीमार व्यक्ति या भारी सामान ले जाने के लिए लिफ्ट की ज़रूरत महसूस कर सकता है।
2. प्रॉपर्टी का मूल्य
अच्छी तरह से रखी गई लिफ्ट पूरी इमारत के फ्लैट्स की कीमत बढ़ाती है। अगर लिफ्ट खराब या बंद पड़ी हो तो पूरे बिल्डिंग का मार्केट वैल्यू घटता है।
3. सामूहिक ज़िम्मेदारी
सोसायटी में फ्लैट खरीदने का मतलब है सामूहिक जीवन अपनाना। सामूहिक जीवन में सुविधाओं और खर्चों की बराबरी से ज़िम्मेदारी निभानी पड़ती है।
4. न्याय का सिद्धांत
अगर हर कोई यह कहकर बचने लगे कि वह जिस सुविधा का उपयोग नहीं करता, उसका पैसा नहीं देगा, तो सोसायटी चलाना असंभव हो जाएगा।
-
वरिष्ठ नागरिक कहेंगे जिम का खर्च क्यों दें।
-
बच्चों के बिना परिवार कहेंगे प्ले एरिया का खर्च क्यों दें।
-
बिना वाहन वालों कहेंगे पार्किंग सुरक्षा का खर्च क्यों दें।
इससे अराजकता और झगड़े बढ़ेंगे।
आम गलतफहमियाँ
-
“हम लिफ्ट नहीं इस्तेमाल करते, तो पैसे क्यों दें?”
→ क्योंकि लिफ्ट खर्च सामूहिक मेंटेनेंस का हिस्सा है। -
“क्या सोसायटी सिर्फ ऊपरी मंज़िल वालों से पैसा ले सकती है?”
→ नहीं, यह गैरकानूनी होगा। -
“अगर जनरल बॉडी पास करे कि निचली मंज़िल वाले मुक्त हों?”
→ ऐसा प्रस्ताव अमान्य होगा क्योंकि यह उपविधियों और कानून के खिलाफ है। -
“क्या उपयोग के हिसाब से चार्ज करना संभव है?”
→ नहीं, किसी के उपयोग को ट्रैक करना असंभव है।
असल ज़िंदगी के उदाहरण
कुछ सोसायटी में इतना विवाद बढ़ा कि कुछ सदस्यों ने लिफ्ट सिर्फ उन्हीं मंज़िलों पर रुकवाने की मांग की जिन्होंने पैसा दिया। मामला कोर्ट तक गया।
लेकिन हर बार कोर्ट ने फैसला दिया कि लिफ्ट खर्च सभी को बराबर देना होगा।
विवाद सुलझाने के उपाय
-
सदस्यों को शिक्षित करें
सोसायटी मीटिंग में उपविधियाँ समझाएँ और कानून बताएं। -
पारदर्शी अकाउंट्स
खर्च का हिसाब साफ दिखाएँ ताकि अविश्वास न हो। -
कानूनी जागरूकता
बताएं कि खर्च न देने पर पेनल्टी, लीगल नोटिस और वोटिंग अधिकार छिन सकते हैं। -
एकता बढ़ाएँ
समझाएँ कि सामूहिक ज़िम्मेदारी निभाने से ही सोसायटी सुचारू रूप से चल सकती है।
निष्कर्ष
कानून साफ है:
हाउसिंग सोसायटी के हर सदस्य को लिफ्ट की मरम्मत और रखरखाव का खर्च बराबर देना ही होगा—चाहे वह ग्राउंड फ्लोर पर रहता हो, पहली मंज़िल पर या सबसे ऊपर।
यह नियम न्यायपूर्ण है, विवाद रोकता है और संपत्ति का मूल्य बनाए रखता है।
इसलिए, अगली बार जब ऐसा विवाद आपकी सोसायटी में उठे, तो याद रखिए:
-
उपविधियाँ और कोर्ट का फैसला सब पर समान लागू होता है।
-
इमरजेंसी में हर किसी को लिफ्ट की ज़रूरत पड़ सकती है।
-
सामूहिक जीवन सामूहिक योगदान से ही चलता है।
सोसायटी तभी मजबूत बनती है जब हर सदस्य साझा ज़िम्मेदारी निभाता है।
Comments
Post a Comment